जेपी के रास्ते पर चलकर ही देश को आर्थिक बदहाली से उबारा जा सकता है : रामगोविन्द चौधरी


 


लखनऊ। नेता प्रतिपक्ष, उत्तर प्रदेश रामगोविन्द चौधरी ने सम्पूर्ण क्रांति यादगार दिवस के अवसर पर शुक्रवार को हमारे कर्तव्य अभियान के तहत लोकनायक जयप्रकाश नारायण की स्मृति में पौधा रोपा, तीन श्रमिकों को सम्मानित किया और कहा कि जेपी के रास्ते पर चलकर ही देश को आर्थिक बदहाली से उबारा जा सकता है।
नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने कहा है कि जेपी देश के मात्र नेता हैं जो स्वतन्त्रता संग्राम में भी देश के हीरो थे और लोकतन्त्र रक्षा के संग्राम में भी। उन्होंने कहा कि देश में तीसरी बार एक बड़ा आन्दोलन शुरू होने की ओर है। इस तीसरे बड़े आन्दोलन का आधार होगा जेपी का विचार।


नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने कहा है कि इस अनियोजित और अचानक लाकडाउन से देश एक ऐसे आर्थिक तबाही के दौर से गुजर रहा है जिसकी कल्पना करने से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इस अनियोजित और अचानक किए गए लाकडाउन से 15 करोड़ से अधिक बारोजगार लोग बेरोजगार हो गए। किसान खेत में अपना उत्पाद नष्ट करने को मजबूर है। रोज कमाने खाने वाली देश की बड़ी आबादी भुखमरी की चपेट में है। छोटे मोटे रोजगार कर खुश रहने वालों की भी हालत चिंताजनक हो गई है। रेल से कटकर, वाहनों से कुचलकर और रास्तों में भूख प्यास से मरने वालों को छोड़िए, राज्य सरकार और भारत सरकार की देखरेख में चल रही ट्रेनों में 80 मजदूर भूख प्यास से मर गए। उन्होंने कहा है कि आर्थिक तंगी को लेकर आए दिन खुदकुशी की खबरें आ रही हैं और सरकार या तो कान में तेल डाले पड़ी है या केवल कागजी निर्देश, उपदेश जारी कर रही हैं और लाठी गोली की भाषा बोल रही हैं। 


नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने कहा कि जेपी ने 1974 में एक और नारा दिया था, 
"सरकार निकम्मी है लेकिन यह देश हमारा अपना है।
इसकी तस्वीर बदलने को लाखों आंखों में सपना है।"
हम सभी लोग इस नारे को याद करते हुए दुखी जनों को फिर से नई जिंदगी जीने के लिए प्रेरित करें, स्वदेशी अपनाएं और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की स्मृति में कम से कम एक पौधा जरूर रोपें।


नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने कहा कि 1974 का छात्र युवा आंदोलन गुजरात विद्यापीठ में मेस, हास्टल, शिक्षण शुल्क, पुस्कालय में फीस वृद्धि को लेकर प्रारम्भ हुआ था। बाद में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई का मुद्दा भी इस आन्दोलन का मुख्य मुद्दा हो गया। बिहार आते आते यह आंदोलन सम्पूर्ण क्रांति में बदल गया। पटना के गाँधी मैदान में 5 जून 1974 को खुद लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इस सम्पूर्ण क्रांति का एलान किया जो आज भी उस समय से अधिक प्रासंगिक है।


नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने कहा है कि वर्तमान में देश में 1974 से लाखगुना बदतर स्थिति व्याप्त है। इन सरकारों की कारपोरेट समर्थक नीतियों की वजह से देश 1947 से पूर्व की स्थिति में पहुंच गया है। ये नए  अंग्रेज जुल्म और लूट में पुराने अंग्रेजों को भी मात दे रहे हैं। इनसे मुक्ति का एक मात्र रास्ता है, 1974 से भी बड़ा छात्र युवा आंदोलन। उन्होंने छात्रों और नवजवानों से अपील की है कि वह पांच जून को लोकनायक जयप्रकाश नारायण को नमन करें। सम्पूर्ण क्रांति को याद करें और लाकडाउन नियमों का पालन करते हुए 1974 से भी बड़े आंदोलन की तैयारी करें लेकिन दुखीजनों की मदद के साथ।