उप्र आबकारी नियमावली में अनुमन्य सीमा को अनुमोदन मिला

 


लखनऊ। आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव संजय आर. भूसरेड्डी द्वारा अवगत कराया गया है कि पुरानी पद्धति से अल्कोहल, ई.एन.ए. के निर्माण हेतु प्लांट-मशीनरी के स्थान पर नयी टेक्नोलॉजी आधारित प्लांट/मशीनरी की स्थापना होने के कारण नये प्लांटों के संचालन में अल्प मात्रा में छीजन होने के दृष्टिगत पुर्नआसवन की व्यवस्था में पूर्व निर्धारित छीजन की दर को राजस्व अभिवृद्धि के दृष्टिकोण से कम किया जाना तथा देशी मदिरा व विदेशी मदिरा के पुर्नआसवन को भी सम्मिलित किया जाना उपयुक्त पाते हुये नियमावली के नियम-1(ख) के आगे नियम-1 (ग) एवं (घ) जोड़ा गया है।


पुर्नआसवन की प्रक्रिया में छीजन की दर को कम किये जाने से सादा एवं मसालेदार स्प्रिट के निर्माण हेतु अतिशय छीजन पर (36 प्रतिशत वी/वी) देशी मदिरा पर तत्समय आरोपित होने वाले प्रतिफल शुल्क के समान एवं रेक्टिफाइन स्प्रिट, ई.एन.ए., एन्हाइड्रेस अल्कोहल/एथनॉल के निर्माण हेतु निर्धारित छीजन से अधिक छीजन होने पर इकोनोमी श्रेणी की विदेशी मदिरा की तत्समय प्रतिफल शुल्क की दर से आरोपित होने पर तथा अधोमानक देशी व विदेशी मदिरा के पुर्नआसवन से प्राप्त होने वाले अल्कोहल से पुनः मानक के अनुरूप देशी व विदेशी मदिरा उत्पादन के फलस्वरूप राजस्व की अभिवृद्धि होगी। उक्त नियमावली के संगत नियमों में छीजन की वर्तमान अनुमन्य सीमा की प्रत्येक श्रेणी में 1 प्रतिशत की कमी की गयी है।


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