गो संरक्षण केन्द्रों का संचालन चीनी मिलों से चलाने की मांग होगी
- गोसेवा आयोग द्वारा निराश्रित गोवंश की समस्या के समाधान के लिये अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा की गई

 

निराश्रित गोवंश के संरक्षण-संवर्धन हेतु विभिन्न प्रस्तावों पर सहमति

लखनऊ, 24 अक्टूबर। उप्र गोसेवा आयोग के अध्यक्ष, प्रो. श्याम नन्दन सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन मीटिंग हाॅल में गोसेवा आयोग की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में आयोग द्वारा निराश्रित गोवंश की समस्या के समाधान के लिये अब तक किये गये कार्यों की समीक्षा की गयी तथा भविष्य के लिये निराश्रित गोवंश के संरक्षण-संवर्धन, कल्याण हेतु प्रभावी कार्यक्रम तैयार कर क्रियान्वित करने के लिये विभिन्न प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की गयी। बैठक में पशुधन विभाग के प्रमुख सचिव बीएल मीणा भी उपस्थित थे।

यह जानकारी उप्र गोसेवा आयोग के सचिव डा. आनन्द कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि चीनी मिलों के परिसर में गोसंरक्षण केन्द्र स्थापित कराने अथवा बड़े गो संरक्षण केन्द्रों का संचालन चीनी मिलों के सुपुर्द किये जाने हेतु उच्च स्तर पर सरकार को मांग पत्र प्रेषित किया जायेगा। इसके अतिरिक्त पंजीकृत गोशालाओं हेतु भूमि क्रय करने अथवा दान में प्राप्त करने के लिये विलेख पर स्टाम्प शुल्क से मुक्त किये जाने एवं ऊर्जा विभाग द्वारा काॅमर्शियल दर के स्थान पर कृषि दरों पर विद्युत आपूर्ति किये जाने हेतु प्रस्ताव विद्युत मूल्य नियामक आयोग को प्रेषित करने पर सहमति प्रदान की गयी है।

श्री कुमार ने बताया कि गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने, किसानों की आय में वृद्धि करने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोग के मार्गदर्शन एवं कृषि, उद्यान, पशुपालन, वन, जैव ऊर्जा बोर्ड, वैकल्पिक ऊर्जा एवं सीमैप के संयुक्त रूप से कार्य आरम्भ करने, उप्र राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद के मण्डी समितियों के दो प्रतिशत मण्डी शुल्क सेस को एकमुश्त आयोग को प्रदान करने तथा इस धनराशि से केवल पंजीकृत गोशालाओं में संरक्षित गोवंश के भरण-पोषण अनुदान पर नियमानुसार व्यय करने की भी सहमति प्रदान की गयी है।

सचिव डा. आनन्द कुमार ने जानकारी दी कि गो संरक्षण, गो संवर्धन व गो कल्याण को प्रभावी बनाने के लिये एक कृषक/पशुपालक प्रशिक्षण केन्द्र किसान छात्रावास एवं पंचगव्य आधारित उत्पादों के अनुसंधान एवं प्रयोग विषयक केन्द्र पशुपालन विभाग के प्रक्षेत्र जैसे-निवलेट, (बाराबंकी), बाबूगढ़ (हापुड़) में से किसी एक स्थान पर स्थापित किये जाने पर भी सहमति व्यक्त की गयी। इसके साथ ही आयोग के कार्य संचालन हेतु कर्मचारियों/अधिकारियों के पदों के सृजन का प्रस्ताव भी किया गया।