आयुर्वेद दवाओं का फर्जी विज्ञापन दिया तो नपेंगे वैद्य
- उप्र में भ्रामक आयुष विज्ञापनों पर रोक

 

लखनऊ, 19 सितम्बर। उत्तर प्रदेश में आयुर्वेद औषधि निर्माता एवं विक्रेता फर्मो द्वारा किये जा रहे भ्रामक प्रचार-प्रसार आदि के रोक-थाम हेतु आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी (आयुष) विज्ञापनों का प्रतिषेध किया गया है। 

यह जानकारी निदेशक आयुर्वेद प्रो. एसएन सिंह ने दी है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद औषधों के विनिर्माता या उसका अभिकर्ता किसी रोग, विकार, लक्षण अथवा दशा के निदान, इलाज, शमन उपचार या निवारण के उपयोगार्थ किसी औषध संबंधी किसी विज्ञापन के प्रकाशन में भाग नही लेगें। आयुर्वेद, औषध विनिर्माता अधिसूचना से पूर्व जारी अथवा प्रसारित विज्ञापन के लिए इस विज्ञापन के प्रकाशन की तारिख से तीन मास पूर्व की अवधि के भीतर विशिष्ट पहचान संख्या के लिए आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि आवेदन को यदि वह अपूर्ण हो अथवा आशयित विज्ञापन के विनिर्माता का संपर्क विवरण न दिया गया हो, अथवा विज्ञापन की विषय-वस्तु में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अभद्रता अथवा अश्लीलता झलकती हो। किसी ऐसे आयुर्वेद औषध के बारे में हो जो उस औषध या औषधि के उपयोग से पुरूष अथवा महिला के यौनांगों की लम्बाई अथवा आयाम या क्षमता के निष्पादन में वृद्धि का सुझाव देता हो, की दवा को अस्वीकार कर दिया जायेगा। यह प्रतिष्ठित व्यक्तियों अथवा सरकारी पदधारियों के फोटो या प्रशंसा पत्र, प्रदर्शित करता हो, अथवा विशिष्ट पहचान के आवंटन के लिए आवेदन राज्य अनुज्ञापन प्राधिकारी अथवा औषध नियंत्रक को प्रारूप में प्रस्तुत किया जायेगा जिसमे पाठ्य संदर्भ, अधिकाधिक पुस्तकों में से तर्क, संकेत अथवा उपयोग, सुरक्षा, प्रभावशीलता तथा औषधि की गुणवत्ता सम्बन्धी प्रमाण ,जैसे दावों को विशिष्ट तौर पर दर्शाया गया हो।

आयुर्वेद निदेशक ने बताया कि यदि आयुर्वेदिक औषधि के उत्पादन के लिए एक से अधिक राज्य में अनुज्ञापन दिए गए हैं तो विज्ञापन के लिए आवेदन राज्य के अनुज्ञापन प्राधिकारी के यहाँ प्रस्तुत किया जाएगा जहां पर विनिर्माता का कारपोरेट कार्यालय स्थित है।

राज्य अनुज्ञापन प्राधिकारी आवेदन के निपटान के लिए यदि अपेक्षित हो, तो सम्बद्ध तकनीकी विशेषज्ञों से परामर्श ले सकता है। आवेदक, अनुज्ञापन प्राधिकारी अथवा औषधि नियंत्रक को अपेक्षित सूचना भी प्रस्तुत करेगा। ऐसा न करने की स्थिति में आवेदन अस्वीकृत कर दिया जायेगा। आवेदन फीस भी जब्त कर ली जायेगी। प्राधिकारी द्वारा दिए गये निर्देशो का अनुपालन न किया गया हो तो राज्य अनुज्ञापन प्राधिकारी आयुर्वेद औषधियों के विनिर्माताओं के अनुज्ञप्ति को नियम 159 के उपबंधो के अनुसार निलंबित अथवा रद्द कर सकता है। 

    इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी लखनऊ स्थित इन्दिरा भवन के निदेशक आयुर्वेद अथवा सहायक औषधि नियंत्रक कार्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं।