कुलपति अध्यापकों की क्षमता का भरपूर उपयोग करें : राज्यपाल


लखनऊ। राजभवन सबके लिये खुला है। हम सभी की सुनते हैं। हम यहां न्याय देने के लिये बैठे हैं। छात्रों के भविष्य के साथ किसी को भी खिलवाड़ करने नहीं दिया जायेगा। विश्वविद्यालय ऐसी कोई गलती नहीं करें, जिसका खामियाजा छात्रों को बिना किसी गलती के भुगतना पड़े। राजभवन तक किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए।


उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज राजभवन से समस्त राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि कुलपति एवं अध्यापकों की नियुक्ति छात्रों के लिये ही होती है, ऐसे में आप सभी लोगों का यह संयुक्त दायित्व बनता है कि छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। विश्वविद्यालय को आगे ले जाना आप सभी का दायित्व है।


कुलपति अध्यापकों एवं छात्रों को विश्वास में लेकर कार्य करेंगे तभी विश्वविद्यालय का नाम रोशन हो सकेगा। अध्यापकगण अपनी योग्यता को ध्यान में रखते हुए छात्रों के बीच अपनी छवि स्वच्छ बनाये रखें। कुलपति सभी समितियों में छात्रों को भी शामिल करें क्योंकि इनके शामिल रहने से कई प्रकार की समस्याएं स्वतः खत्म हो जायेंगी। कुलपति स्वकेन्द्रित होकर कार्य न करें, बल्कि अध्यापकों की क्षमता का भरपूर उपयोग करें क्योंकि सभी में सभी गुण नहीं होते।


राज्यपाल ने कुलपतियों से कहा कि कोई भी कुलपति अपनी अनुपस्थिति में राजभवन की इजाजत के बिना किसी को चार्ज नहीं देगा। विश्वविद्यालय राज्य सरकार, केन्द्र सरकार एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही परीक्षा करायें, इसमें किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नैक द्वारा निर्धारित बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक कैलेण्डर बनाये तथा उसी के अनुरूप कार्य करें। राज्यपाल ने कहा कि कुलपति एवं रजिस्ट्रार छात्रों की शिकायतों को सुनने के लिए सप्ताह में एक दिन एक घंटे का समय निर्धारित करें तथा उस अवधि में केवल उनकी शिकायतों को सुनकर निस्तारण करने का काम करें।


श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्या परिषद एवं कार्य परिषद से पारित कराने के बाद ही प्रकरण विशेष को राजभवन भेजे। प्रयास यह होना चाहिए कि विश्वविद्यालय स्तर पर ही वरिष्ठता एवं प्रोन्नति संबंधी सभी प्रकरण ससमय निस्तारित कर दिये जाये। उन्होंने कहा कि राजभवन द्वारा जो भी निर्देश विश्वविद्यालयों को समय-समय पर भेजे जाते हैं, उसे ध्यान में रखते हुए ही कार्य किये जाएं। शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक नियुक्तियों के संबंध में प्रकाशित किये जाने वाले विज्ञापनों में शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव आदि का सुस्पष्ट उल्लेख होना चाहिए तथा पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाकर सभी नियुक्तियां की जाए तथा इसमें किसी भी तरह का पक्षपात नहीं होना चाहिए। कुलपति केवल अपने अधिकार क्षेत्र वाले प्रकरण पर ही निर्णय लें तथा इसके बाहर जाने का प्रयास न करें।


राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रयत्नशील है। उन्होंने सभी कुलपतिगणों से अपेक्षा की कि वे कोविड-19 जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विश्वविद्यालय का सुचारू रूप से संचालन करें। कोविड-19 के कारण मिलने वाले समय का सदुपयोग करें एवं इसके बाद के समय में किए जाने वाले कार्य जैसे कि परीक्षाओं का आयोजन, परीक्षाफल घोषित करना, नये सत्र में प्रवेश की प्रक्रिया तथा नये सत्र का आरम्भ आदि के लिए अभी से सुदृढ़पूर्ण आयोजन करें। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय को भारत के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय की श्रेणी में लाने के लिए जो भी आवश्यक कदम हों, वह लेने की रणनीति अभी से तैयार करें। उन्होंने यह भी अपेक्षा की कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय अच्छी नैक ग्रेडिंग प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध बनें। 
वीडियो कान्फ्रेंसिंग में अपर मुख्य सचिव राज्यपाल, श्री महेश कुमार गुप्ता, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा, श्रीमती मोनिका एस. गर्ग, विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) श्री केयूर सम्पत के अलावा अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।