झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर को ज्ञापन सौंपा

- झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर को ज्ञापन सौंपा


लखनऊ। झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर से भेंट की। इस मुलाकात में उन्हें पत्रकारों के कल्याण से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही उनसे सरकार की तरफ से पत्रकारों को राहत एवं स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने का आग्रह किया गया।


 मंत्री को सौंपे गये ज्ञापन में यह कहा गया है कि कोरोना की रोकथाम के लिए आपकी सरकार द्वारा की गयी पहल और निरंतर निगरानी के लिए यूनियन झारखंड सरकार का आभार व्यक्त करती हैं। वर्तमान में कोरोना संकट से उत्पन्न स्थिति के बीच कार्यरत पत्रकारों की स्थिति की तरफ ध्यान दिलाना आवश्यक है। इस अवस्था में अनेक पत्रकार भूखमरी की कगार पर हैं। अखबार और चैनलों में कार्यरत ग्रामीण पत्रकारों की स्थिति सबसे दयनीय है जो इस कठिन परिस्थिति में भी लगातार अपने इलाके की निगरानी करते हुए समाचार संप्रेषण का काम कर रहे हैं। अपने संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा की दिशा में बड़े अखबारों और चैनलों ने कुछ भी नहीं किया है।


दूसरी तरफ वैकल्पिक रोजगार कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले पत्रकार भी काम बंद होने की वजह से बेकार हैं। अनेक संस्थानों में लोगों को हटाया गया है तथा अनेक में वेतन कटौती कर दी गयी है। कई संस्थानों में अपने पत्रकारों के आने पर रोक है और उन्हें घर से ही काम करने को कहा गया है। कई संस्थानों में कार्यरत छायाकारों के अलग से काम करने का स्थान दिया गया है ताकि बाहर से आने वाले संक्रमण का असर अन्य लोगों पर नहीं पड़े।


देश में 90 प्रतिशत पत्रकार जिलों और ग्रामीण इलाकों में काम करते हैं। कहने को इन्हें अंशकालिक कहा जाता है पर ये पूरे दिन चैनल या अखबारों के लिए काम करते हैं। कुछ अवसरों पर विज्ञापन लाने का काम भी करते हैं, जिनके एवज में कमीशन मिलता है तो घर में राशन आ जाता है।  कोरोना महामारी का प्रकोप अखबारों पर बहुत पड़ा है। बड़ी संख्या में अखबार बन्द हो गए हैं। बड़े बड़े अखबारों के पन्ने कम हो गये हैं। सभी में विज्ञापन कम होने की वजह से इसका असली नुकसान सिर्फ पत्रकारों को ही उठाना पड़ रहा है।


झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के सदस्य असली पत्रकारों की संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़ा है। हमारे सदस्य और पदाधिकारी आम जनता के साथ आर्थिक तौर पर कमजोर पत्रकारों की मदद कर रहे हैं पर हमारी अपनी भी सीमाएं हैं इसलिए बहुत अधिक दिनों तक यूनियन के साथी यह जो काम चुपचाप कर रहे हैं, उसे जारी नहीं रख पायेंगे। उनसे मिलने गये प्रतिनिधि मंडल में यूनियन के अध्यक्ष रजत कुमार गुप्ता, महासचिव शिव कुमार अग्रवाल, कोषाध्यक्ष जगदीश सिंह अमृत के अलावा प्रवक्ता अरविंद गुप्ता के अलावा जावेद अख्तर और अभिषेक सिन्हा शामिल थे।


ज्ञापन में यह बताया गया है कि सरकारों की तरफ डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य कर्मचारियों के लिए कोरोना महामारी के प्रकोप में जान जाने पर 50 लाख का बीमा देने की घोषणा की गई है। संकट की इस घड़ी में पत्रकारों के लिए किसी स्तर पर कोई सुरक्षा कवच ही नहीं है। वे लगातार अपनी जान जोखिम में डालकर समाज की यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अत: झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स राज्य सरकार से पत्रकारों को राहत देने संबंधी नीतिगत निर्णय लेने के अलावा राज्य के सभी पत्रकारों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाने हेतु मुख्यमंत्री की पहल का अनुरोध करते हैं।


देश के अन्य राज्यों में पहले से ही इस किस्म के पत्रकार कल्याण संबंधी योजनाओं को लागू किया जा चुका है। इस ज्ञापन में बताया गया है कि पूर्व में भी हेमंत सोरेन की सरकार के कार्यकाल में पत्रकारों को यह लाभ दिया गया था। उसे योजना को बेहतर बनाकर नये सिरे से उसे लागू करने से सभी पत्रकारों का मनोबल ऊंचा होगा।