समाज में अपनी उपयोगिता और क्षमता को भूल चुका है व्यक्ति: डी.एन. लाल

पहले समाज में बच्चियां सुरक्षित हों तभी ज्ञान की बात की जा सकती है- प्रो.रश्मि सोनी
लखनऊ। स्वामी विवेकानन्द केन्द्र का उद्देश्य मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण था, लेकिन आज हमारे समाज के सभी युवाओं में सोच बदल चुकी है उनमें डिग्री लेकर नौकरी पाने के अलावा कुछ नहीं बचा है। उनके अंदर जो भी भावना और विचार आता है, वह है अपने को समाज में दिखाना। जबकि हमारी समाज के प्रति कितनी उपयोगिता है। इस ओर कोई युवा ध्यान नहीं दे रहा है। हमारी शिक्षा प्रणाली गुरूकुल से कान्वेन्ट हो चुकी है, जिसमें त्याग और सेवा की भावना नहीं है। पहले की शिक्षा पद्धति में भौतिक सुख साधन नगण्य हुआ करते थे। यह विचार यूनाइट फाउण्डेशन की ओर से माह के चौथे शनिवार को आयोजित यूनाइट मंथन कार्यक्रम में सेवानिवृत्त आईएएस डी.एन. लाल ने व्य​क्त किये।
सेवानिवृत्त आईएएस डी.एन. लाल ने कहा कि विवेकानन्द के जमाने में हमारे देश की जीडीपी विश्व में 25 फीसदी थी जो आज घटकर 4 फीसदी पर रह गयी है। आज हमारे अन्दर तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं- भावना, विचार और ​क्रिया। जब हम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर पाएंगे, तभी हमारे विचारों में बदलाव आएगा। उसके बाद उसी प्रकार के क्रिया कलाप हो जाएंगे। हमारे देश के तक्षशिला विश्वविद्यालय की पुस्तकों को चोरी करके लोगों ने जितना ज्ञान प्राप्त कर लिया, उतना आज के विद्यालय नहीं दे पा रहे हैं। श्री लाल ने कहा कि धर्म के दस लक्षण बताए गये हैं जो मनुष्य के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण हैं। 
पहले समाज में बच्चियां सुरक्षित हों तभी ज्ञान की बात की जा सकती है- प्रो.रश्मि सोनी
कार्यक्रम को सम्बोधित करते ​हुए प्रो. र​श्मि सोनी ने कहा कि जब हमारे समाज की बच्चियां ही सुरक्षित नहीं हैं तो शिक्षा की बात करना बेमानी है। समाज के कुछ लोग मानसिक रूप से विकृत हो चुके हैं, उनमें बच्चियों को समझने और अपने आपके विषय में सोचने की क्षमता समाप्त हो चुकी है। तभी तो ​3 साल की बच्ची से लेकर एक वृद्ध महिला के साथ बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हम जो पुस्तकों में पढ़ रहे हैं, वहीं तक सीमित है। वह असली ज्ञान नहीं है। समाज में जो युवा घूम रहा है, वह एक मुखौटा लगाए है। वह पूरी तरह कन्फ्यूज है। हमें युवाओं में अपने आपको स्वीकार करने की प्रवृत्ति जाग्रत करने की जरूरत है। इसके लिए हमें एक साथ आना पड़ेगा। युवाओं की सोच सिर्फ डिग्री और नौकरी तक सीमित होकर रह गयी है।
प्रो. र​श्मि सोनी ने कहा कि हमारे समाज के युवाओं पर उनके माता पिता का दबाव है। हमारी शिक्षा पद्धति में बदलाव की जरूरत है, क्योंकि बीए का छात्र बीकाम और बीएससी का छात्र बीए के विषयों के सम्बन्ध में जानकारी नहीं रखता। इसलिए इसे बदलने की आवश्यकता है। हमें अध्यापकों, अभिभावकों और छात्रों को जागरूक करने की आवश्यकता है।​ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दस बिन्दु गिनाए हैं जो लाइफ ​स्किल के ​लिए जरूरी हैं।  


इस मौके पर समाधान फाउण्डेशन के यतीन्द्र गुप्ता, अरुणेन्द्र श्रीवास्तव, बोरा इंस्टीट्यूट के सच्चिदानन्द सिंह, यूनाइट फाउण्डेशन के अध्यक्ष डा. पी.के. त्रिपाठी, उत्तम मिश्रा, रामचन्द्र मिशन के दिनेश मिश्रा,देवेन्द्र कुमार मोदी, अमलेश कुमार सिंह, अरविन्द कुमार मिश्रा, प्रेम प्रकाश द्विवेदी ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने किया।